जीने की ज़रूरत

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तू ही जीने की ज़रूरत बन गया है,
तेरे होने से ही मुझे सब मिल गया है,
पूरी होती हूं जब तू मेरे पास होता है,
तुझसे थोड़ा-सा भी दूर होकर दिल ये मेरा रोता है।

सपने बुने तो थे किसी के आने के,
वो अनकही बातों को सच बनाने के,
दिल को कुछ इस तरह छू जाने के,
किसी के आकर न जाने के।

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यू जकड़ लिया है तुम्हारे प्यार ने,
के अब तुम्हारे सिवा कुछ दिखाई नहीं देता,
अब न ही यह दिल तुम्हारे बिना है रहता।

कौन कहता है कि रास्ते भूले नहीं जाते,
मंजिल मिलने पर कौन हैं दर-ब-दर डगमगाते,
मुझे तो बस इतना पता है,
कि तुम्हारे सिवा मैं क्या सब कुछ लापता है।

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