थक जाती है जुबा मेरी जिंदगी से जब

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थक जाती है जुबा मेरी जिंदगी से जब,
शिकायत करने लगता हूं
ऐसा नहीं है कि मैं मौत से डरता हूं
भागना नहीं सिखाया तूने मुझे खुदा
पर क्या दिया है जीवन जीने को यह तो बता।

खत्म करने को जिंदगी कभी मन करने लगता है
जो दिल दिया है कभी यह भी टूटा करता है
कब तक ऐसे जीना गवारा हो पाएगा
जब सब कुछ बर्बाद होता जाएगा।

ऐ खुदा बस बहुत हो गया तेरा मुझे सताना
ऐसे मेरे आंसुओं का बेहते जाना
थक चुका हूं अब थोड़ा सा आराम दे दें
इस दुनिया से दूर अपनी घर में अब पेगाम दे दें।

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