ज़िन्दगी को यू ही अपना लेती हूँ

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आँखों को झुकाए आज भी अपनी ज़िन्दगी को यू ही अपना लेती हूँ,

कड़वाहत तो हर रिश्ते में है वो भी निभा लेती हूँ,

जब दर्द का मौसम आता है तो आसुओं को छुपा लेती हूँ,

वही शक्श जो कहता था ध्यान रखूँगा तुम्हारा, अब उससे ही अपने दामन को बचा लेती हूँ|

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दर्द के आलम आ जाते है अपनी बरशात लेकर,

खुदको छुपाना पड़ता है दिल में जज़्बात लेकर,

जो खुशियाँ देते थे कभी आज गम देते है,

हमारा ही फासला था इसलिए हम आज इन्हें भी हँसकार लेते है|

 

वादों ने हरा दिया आज हमे,

चलते है दिमाग में पुराने ख़यालात हर समय,

मांग लेती हूँ खुदका से सिर्फ ये ही दुआ करके,

प्यार अगर वापिस ना लोटा सके तो मुझे उससे जुदा कर दें मेरी आँखे बंद करके|

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